इंदौर। जिला जेल में कैदियों तक चोरी-छिपे नशे का सामान पहुंचाने की कथित कोशिश का मामला सामने आया है। जेल के मुख्य गेट पर चेकिंग के दौरान एक प्रहरी के अंडरगारमेंट्स, अंदरूनी कपड़ों और जूतों से बीड़ी व तंबाकू के पैकेट बरामद किए गए। चरस मिलने को लेकर भी दावे सामने आए हैं, हालांकि जेल अधीक्षक ने इसकी पुष्टि नहीं की है। मामले के सामने आने के बाद संबंधित प्रहरी को जेल ड्यूटी से हटा दिया गया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार रात जिला जेल के मुख्य गेट पर उप जेलर राकेश उपाध्याय, चंद्रिका पटेल, नानूराम सोनी और विजय आर्य की ड्यूटी थी। रात करीब 2 बजे जेल प्रहरी देवेंद्र चौहान ड्यूटी पर पहुंचा। नियमानुसार तलाशी के दौरान उसके कपड़ों और जूतों में छिपाकर रखे गए बीड़ी और तंबाकू के पैकेट मिले। सूत्रों के मुताबिक, बरामद सामान में चरस भी शामिल थी।
प्रहरी की तलाशी और सामान जब्त करने की पूरी प्रक्रिया जेल परिसर में लगे CCTV कैमरों की निगरानी में की गई। जेल अधीक्षक जवाहर मंडलोई ने बीड़ी और तंबाकू मिलने की पुष्टि की है, लेकिन चरस मिलने की बात से इनकार किया है। ऐसे में चरस की बरामदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में देवेंद्र चौहान ने कथित तौर पर बताया कि चरस द्वारकापुरी क्षेत्र के नशा कारोबारी शुभम नेपाली तक पहुंचाई जानी थी। शुभम फिलहाल जिला जेल में बंद है। वहीं, अन्य बैरकों में बंद कैदियों तक बीड़ी और तंबाकू पहुंचाने की भी कथित योजना थी। बताया जा रहा है कि इस काम के बदले प्रहरी को मोटी रकम मिलने वाली थी। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
इंदौर जिला जेल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। कुछ दिन पहले खजराना के बिल्डर मनोज नागर पर हमले के आरोपी सोनू खरगोश पर जेल के भीतर चाइनीज चाकू से हमला हुआ था। इसके बाद उसे सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया था।
अब जेल के ही एक प्रहरी के पास से प्रतिबंधित या संदिग्ध सामान मिलने के मामले ने सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल संबंधित प्रहरी को जेल ड्यूटी से हटाकर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।